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क्या खोलना चाहते हैं जनऔषधि केंद्र? यहां जानिए पूरी प्रक्रिया

PNN/ Faridabad: जनऔषधि (Janaushadhi Kendra) योजना एक ऐसी योजना है जिसके तहत लोगों को सस्ते में औषधि केंद्र से दवाइयां मिलती हैं. इस योजना के चलते ना सिर्फ लोगों को सस्ती दवाइयां मिलती हैं, बल्कि रोजगार भी मिलता है. दरअसल इस योजना को प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के नाम से जाना जाता है. इस योजना से कोई भी व्यक्ति अपने शहर में औषधि केंद्र खोल सकता है. केंद्र सरकार ने इस योजना की शुरुआत मरीजों और गरीब वर्ग को राहत पहुंचाने के लिए की है. इस योजना के चलते मरीजों को बाजार से कम रेट में दवाइयां दी जाती हैं.

जानकारी के मुताबिक फिलहाल देश में 6000 से ज्यादा औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं, लेकिन अभी और औषधि केंद्र खुलने बाकी हैं. देश में कोई भी व्यक्ति रोजगार प्राप्त करते हुए अपना खुद का जनऔषधि केंद्र खोल सकता है. इसकी खासियत ये है कि ये केंद्र कम रुपयों में खोला जा सकता है और सरकार धीरे धीरे प्रक्रिया के हिसाब से सारा रुपया वापस कर देती है. मोदी सरकार की इस योजना के तहत केंद्र खोलने पर 2.5 लाख रुपये तक की मदद करती है. इतना ही नहीं हर महीने बिक्री पर अलग से 15 % का इंसेंटिव भी मिलता है.

कैसे खोला जा सकता है औषधि केंद्र

जन औषधि केंद्र खोलने से पहले किसी व्यक्ति को 1 लाख रुपए की दवाइयां खरीदनी जरूरी हैं. हालांकि सरकार बाद में खर्च किए हुए रुपए दे देगी. साथ ही सरकार औषधि केंद्र के फर्नीचर से लेकर फ्रीज तक के लिए 1 लाख रुपए देती है. वहीं औषधि केंद्र में कंप्यूटर सिस्टम लगवाने के लिए 50,000 की सहायता सरकार करती है. इसके अलावा औषधि केंद्र खोलने के लिए सरकार ने लोगों को कैटेगरी में बांटा है

औषधी केंद्र खोलने वालों की कैटेगरी

मोदी सरकार ने औषधि केंद्र खोलने वालों को तीन कैटेगरी में बांटा है. पहली कैटेगरी के मुताबिक कोई भी व्यक्ति जो फार्मासिस्ट, डॉक्टर, रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर है और फिलहाल बेरोजगार है वो जन औषधि केंद्र खोल सकता है. वहीं दूसरी कैटेगरी में ट्रस्ट, एनजीओ, प्राइवेट हॉस्पिटल और सोसायटी औषधि केंद्र को शुरू कर सकते हैं. वहीं तीसरी और आखिर कैटेगरी में राज्य सरकारों की चुनी हुई एजेंसियां केंद्र खोल सकती हैं.

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Shafi-Author

Shafi Shiddique