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बालक सकपाल ऐसे बना ‘ डॉ भीमराव आंबेडकर’

PNN/Faridabad: एक महान निर्माता और समाजसेवी डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि 6 दिसंबर को हर साल पूरे देश में मनाई जाती है। इस दिन को देश में महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

‘अंबेडकर’ उपनाम के पीछे है दिलचस्प कहानी’

डॉ. भीमराव का जन्म 4 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू में एक महार परिवार में हुआ था. उनका परिवार मराठी भाषी था और मूल रूप से वो महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के अंबावाड़ी के थे. उनके पिता रामजी मालोजी सकपाल ब्रिटिश आर्मी में सुबेदार जबकि मां भीमाबाई गृहणी थीं. अंबेडकर अपने चौदह भाई-बहनों में सबसे छोटे थे. पिता रामजी ने अंबेडकर की पढ़ाई पर शुरू से ही ध्यान दिया.

डॉ. अंबेडकर ने 1907 में बम्बई के गर्वमेंट हाई स्कूल से मैट्रिक परीक्षा पास की. ऐसा करने वाले वह हिंदुस्तान के पहले महार थे. इससे अंचभित होकर उनके गुरु ने बालक सकपाल से कहा, ‘आज तुमने पूरे अंबावाड़े गांव का पूरा नाम रोशन किया है, तो तुम आज से अंबेवाड़ीकर कहलाओगे.’ और यहीं उनका सरनेम सकपाल से बदलकर अंबेडकर हो गया. बाद में उन्होंने एलफिंस्टन कॉलेज से ग्रेजुएशन किया.

उनका निधन 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली शहर में हुआ। उनके पार्थिव शरीर को 7 दिसंबर 1956 को मुंबई ले जाया गया । जहां उनके शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। जब उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था तब उनके 10 लाख अनुयायियों ने उन्हें साक्षी मानकर बौद्ध धर्म अपनाने की दीक्षा ली।

भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवन काल में सभी वर्गों जिसमें महिलाऐं, पुरुष, बच्चे आदि के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए और उनको सक्षम बनाने के लिए अनेक प्रकार के कार्य किए। वह एक ऐसे महान इंसान थे जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी दूसरों के लिए त्याग दी। उनके महान कार्य को याद करते हुए इस दिन देशवासियों द्वारा विशेष समारोह का आयोजन किया जाता है।

उन्होंने एक महान संविधान का निर्माण किया जो देश को एकजुट करने में मदद करता है जिसके देशवासी अपने अधिकारों को जान पाए।अम्बेडकर द्वारा लिखित भारत का संविधान अभी भी देश का मार्गदर्शन कर रहा है और आज भी ये कई संकटों के दौरान सुरक्षित रूप से बाहर उभरने में मदद कर रहा है।वो एक बहुजन राजनीतिक नेता और एक बौद्ध पुनरुत्थानवादी होने के साथ-साथ भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार भी थे। उन्हें बाबासाहेब के नाम से भी जाना जाता है।

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Shafi-Author

Shafi Shiddique